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निर्मला सीतारमण का बजट भाषण 85 मिनट का, विपक्ष ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल

Satyakhabarindia

आज लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह उनके द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किया गया बजट है। बजट की घोषणा के बाद से ही शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इस बजट की तुलना उम्मीदों से कमतर बताते हुए सरकार की नीतियों पर कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि बजट दस्तावेजों का विस्तार से अध्ययन करना अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती 90 मिनट में यह स्पष्ट हो गया कि यह बजट उच्च उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। उन्होंने इसे पूरी तरह से निराशाजनक बताया।

कांग्रेस का बजट पर आरोप: पारदर्शिता की कमी

जयराम रमेश ने कहा कि बजट भाषण में पारदर्शिता की कमी दिखी। उन्होंने खासकर बजट आवंटन और योजनाओं के स्पष्ट आंकड़े नहीं मिलने पर चिंता जताई। उनका कहना था कि प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजट में क्या राशि आवंटित की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी जनता तक नहीं पहुंची। इससे बजट की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। कांग्रेस का मानना है कि सरकार को विकास के विभिन्न क्षेत्र जैसे किसान, आदिवासी, महिलाएं और युवा वर्ग के लिए योजनाओं की वास्तविक दिशा स्पष्ट करनी चाहिए।

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आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं

इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उनका यह भाषण लगभग 85 मिनट तक चला। उन्होंने 2026-27 के लिए वित्तीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि सरकार अपनी खर्च नीतियों को सीमित रखते हुए विकास को जारी रखने की योजना बना रही है। आयकर में स्थिरता को कई वित्तीय विशेषज्ञों ने सकारात्मक माना है क्योंकि इससे करदाताओं को स्पष्टता और स्थिरता मिलेगी।

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भारत की आर्थिक प्रगति और विकास के लक्ष्य

निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में यह भी कहा कि भारत तेजी से विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर बढ़ रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विकास के लाभ किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचें। उन्होंने बताया कि सरकार विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए लगातार काम कर रही है और वैश्विक बाजार के साथ तालमेल बनाए रखेगी। साथ ही लंबी अवधि के निवेश के दृष्टिकोण से आर्थिक नीतियां तैयार की जाएंगी ताकि स्थिर और समावेशी विकास संभव हो सके।

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